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Constipation- types & Symptoms (Hindi)

कब्ज़ की शिकायत प्राचीन काल से ही मनुष्यों की आम समस्या रही है| कभी आपने सोचा है कि बाकी सब जानवरों की प्रजाति में यह समस्या होती है या नहीं? चलिए हम आपको बताते हैं| ज़्यादातर जानवर भोजन केवल भूख लगने पर ही खाते हैं| ऐसे जानवर, जो की बहुत सारा खाना इकठ्ठा खा लेते है, प्रकृति ने उनके आमाशय (stomach) के पास एक थैली की व्यवस्था की है, जिसमें अतिरिक्त भोजन संचित हो जाता है, और ज़रुरत पड़ने पर थोडा-थोडा खाना ही पचाने के लिए आमाशय में जाता है| आपने भी गौर किया होगा की कभी-कभी खाली समय में गाय, भैंसे, ऊंट आदि जानवर जुगाली करते हुए देखे जाते हैं | तो असल बात यह है कि इंसान ही एक ऐसी प्रजाति है, जिसके सामने खाने का भण्डार है, और वह ज़रुरत न पड़ने पर भी अपनी जिव्हा की लालसा शांत करने में लगा रहता है |

बेवक्त ज्यादा खाने से, अप्राकृतिक आहार बहुतायत में लेने से, व्यायाम ना करने से, प्रचुर मात्र में पानी ना पीने से, दवाओं और नशीली वस्तुओं का अधिक सेवन करने से, मल त्याग करने की इच्छा को दबाने आदि अनेक कारणों से पाचन प्रक्रिया ठीक से काम नहीं कर पाती, जिसके फलस्वरूप कब्ज़ जैसी समस्याएं शरीर में पैठ बनाने में कामयाब हो जाती है|

आम बोलचाल में प्रयोग किया जाने वाले शब्द ‘कब्ज़’ के मायने बहुत व्यापक एवं विस्तृत हैं| किसी रोगी को किस तरह की कब्ज़ है, यह समझने के लिए रोगी से यह जानकारी लेना अत्यंत आवश्यक है कि वह किस परेशानी को ‘कब्ज़’ का नाम दे रहा है , क्योंकि कब्ज़ के मायने सभी रोगियों में अलग हो सकते हैं| ज़ाहिर है कि सबकी तकलीफ अलग होगी तो उनके होने के कारण भी अलग होंगे| इस बात में भी दो राय नहीं हो सकती की जिस तरह की ‘कब्ज़’ का आप उल्लेख करेंगे, उनके लिए औषधि भी अलग होगी|

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